बुरहानपुर जिले में लागू हो केले की फसल का मौसम आधारित बीमा, लोकसभा में सांसद ज्ञानेश्वर ने पुरजोर तरीके से उठाई मांग
लोकसभा में गूंजा केला फसल बीमा का मुद्दा
बुरहानपुर। ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक शहर बुरहानपुर की यहां उत्पादित केले से भी देश-विदेश में अलग पहचान है। केला यहां की प्रमुख फसल है। केले को एक जिला एक उत्पाद में भी शामिल किया गया है। जिले के किसानों को 5 साल से केला फसल पर बीमा का लाभ दिए जाने की मांग सतत उठ रही है। इस संबंध में क्षेत्रीय किसानों तथा किसान संगठनों द्वारा खंडवा लोकसभा सांसद ज्ञानेश्वर पाटील से भेट कर केला फसल बीमा की मांग की जा रही थी।
आज लोकसभा में सांसद ज्ञानेश्वर पाटील ने नियम 377 के तहत पुरजोर तरीके से सरकार के समक्ष केले की फसल पर मौसम आधारित बीमा देने की मांग को उठाया। किसानों के लिये राहत भरी आई खबर से क्षेत्रीय किसानों में हर्ष की लहर दौड़ पड़ी है। सभी ने सांसद पाटील का आभार व्यक्त किया हैं।
सांसद ने लोकसभा में यह कि मांग - मेरे संसदीय क्षेत्र खंडवा के अंतर्गत जिला बुरहानपुर में 60 हजार एकड़ में केले की फसल लगती है। 30 हजार से अधिक किसान केले की खेती से जुड़े हैं। इसलिए केला फसल का मौसम आधारित फसल बीमा होना चाहिए। हर साल मौसम बदलाव, तेज गर्मी, बेमौसम होने वाली बारिश और प्राकृतिक आपदा के कारण किसानों के केले की फसलों का लाखों का नुकसान होता है। किसानों को अपनी फसल उखाड़कर फेकनी पड़ती है। किसानों को हर बार यह डर सताता है कि अगर प्राकृतिक आपदा से फसल को नुकसान हुआ तो क्या होगा, क्योंकि जो मुआवजा फसल बीमा में मिलता है वह राजस्व विभाग के आरबीसी नियम 6-4 के तहत नहीं मिल पाता। केंद्र सरकार द्वारा हर साल केला फसल के बीमे के लिए नोटिफिकेशन जारी किया जाता है। लेकिन 2020 से अब तक नोटिफिकेशन जारी नहीं होने से किसी भी किसान को बीमा फसल का लाभ नहीं मिला। बुरहानपुर में इस बार प्राकृतिक आपदा के कारण 5 बार केला फसल को नुकसान पहुंचा है। अतः मैं कृषि मंत्रीजी से निवेदन करता हूँ कि केले के फसलों का मौसम आधारित फसल बीमा होना चाहिए जिससे हर साल किसानो के केला फसलों के होनेवाले नुकसान का 100 प्रतिशत मुआवजा उनको मिल सकेगा।