मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के अहम निर्देश के बाद पांडारोल नाले का सीमांकन करने पहुंची राजस्व और नगर निगम की टीम
नाले की शासकीय भूमि पर भू - माफिया एवं रसूखदारों का लंबे समय से हैं राज-पाट! उच्च न्यायालय जबलपुर में दायर की गई याचिका के बाद प्रशासन की ओर से सीमांकन शुरू
बुरहानपुर। लालबाग सिंधीबस्ती पांडारोल नाले पर रसूखदार एवं भू माफियाओं ने अतिक्रमण कर रखा हैं। जिसकी शिकायत बुरहानपुर जिले के समाजसेवी, व्हीसल ब्लोअर एवं आर टी आई एक्टिविस्ट राकेश सेईवाल ने कि थी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। तब बुरहानपुर के सक्रिय समाजसेवी राकेश सेईवाल ने उच्च न्यायालय जबलपुर की शरण ली। जिसकी सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति माननीय अरविंद धर्माधिकारी एवं न्यायमूर्ति माननीय अनुराधा शुक्ला ने इस जनहित याचिका (पीआईएल) पर याचिकाकर्ता को 7 दिनों के भीतर पीएलपीसी के समक्ष नया अभ्यावेदन दाखिल करने को कहा गया। जिस पर कलेक्टर भव्या मित्तल ने तहसीलदार रामलाल पगारे से सीमांकन कर प्रतिवेदन मांगा हैं। उसी कड़ी में सीमांकन किया जा रहा हैं। जिसके चलते भू माफिया एवं रसूखदारों में हड़कंप मचा हुआ हैं दिन भर अतिक्रमण को चिन्हित करने का दौर चलता रहा।
इनका क्या कहना है।
राकेश सेईवाल,समाजसेवी, आर टी आई एक्टिविस्ट एवं व्हिसल ब्लोअर - मेरे द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में जनहित याचिका लगाई थी, इसके उपरांत कलेक्टर द्वारा पांडारोल नाले का सीमांकन कार्य कराया जा रहा है। जिस पर अतिक्रमण चिन्हित किया जाएगा। मौके पर पटवारी से चर्चा उपरांत उनके द्वारा बताया गया कि सीमांकन कार्य लालबाग माल के खसरा नंबर 364/1 का ही सीमांकन किया जा रहा है, जबकि मेरे द्वारा शिकायत में सिंधीबस्ती लालबाग रोड पर पांडारोड नाले पर बने पुल से कुछ दूरी से लेकर लालबाग रोड एम पी ई बी ऑफिस तक शासकीय भूमि (भूजल नाले) पर दोनों तरफ के आसपास के रहवासियों, भू माफियाओं एवं अवैध कॉलोनाइजरों द्वारा अवैध रूप से शासकीय नाले की भूमि पर अतिक्रमण कर कब्जा करके पक्के निर्माण किए जाने तथा नाले पर कॉलोनी की बाउंड्री वॉल बनाकर अतिक्रमण करने की शिकायत की गई थी। अतः नाले के दोनों सिरों का सीमांकन कर अतिक्रमण चिन्हित किया जाना चाहिए।
रसूखदार और भू माफियाओं ने कर रखा अवैध कब्ज़ा - आरटीआई एक्टिविस्ट और व्हिसल ब्लोअर राकेश सेईवाल का कहना है कि उनकी शिकायत में सिंधी बस्ती लालबाग रोड पर पांडारोल नाले के किनारे, एमपीईबी ऑफिस तक के क्षेत्र में भू माफियाओं और अवैध कॉलोनाइजरों द्वारा शासकीय नाले पर अतिक्रमण कर पक्के निर्माण करने, कॉलोनियों की बाउंड्री वॉल बनाने और नाले के दोनों किनारों पर कब्जा करने की बात को उजागर किया गया था। फिलहाल सीमांकन कार्य में केवल लालबाग माल के खसरा नंबर 364/1 को सीमांकित किया जा रहा है, जबकि राकेश सेईवाल का कहना है कि नाले के पूरे क्षेत्र का सीमांकन कर दोनों सिरों पर अतिक्रमण की स्पष्ट पहचान की जानी चाहिए। इससे नाले की जमीन को अवैध कब्जों से मुक्त किया जा सकेगा और क्षेत्र में शासकीय भूमि का सही इस्तेमाल सुनिश्चित होगा। राकेश सेईवाल ने इस सीमांकन कार्य को सार्वजनिक हित में अति आवश्यक बताया है और कलेक्टर से अपील की है कि नाले के दोनों सिरों पर विस्तृत सीमांकन कर सभी अतिक्रमणों की पहचान की जाए।
यह है पूरा मामला - मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता राकेश सेईवाल को सात दिनों के भीतर सार्वजनिक भूमि संरक्षण सेल पीएलपीसी के समक्ष एक अभ्यावेदन दायर करने का निर्देश दिया था। इसके बाद उच्च न्यायालय जबलपुर के आदेश पर जनहित याचिकाकर्ता राकेश सेईवाल ने कलेक्टर व अध्यक्ष सार्वजनिक भूमि संरक्षण सेल के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत कर किया था। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा था कि पीएलपीसी कानून के अनुसार उस पर निर्णय ले और एक तर्कसंगत व स्पष्ट आदेश पारित कर याचिकाकर्ता को निर्णय के बारे में तुरंत सूचित करें।
याचिकाकर्ता के जबलपुर उच्च न्यायालय में अधिवक्ता धर्मेंद्र सोनी ने बताया कि यह जनहित याचिका बुरहानपुर जिले के पांडारोल नाले की सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किया गया है और अवैध निर्माण भी किया गया है। जिस पर राकेश सेईवाल ने 10 अक्तूबर 2023 को कलेक्टर बुरहानपुर से नाले पर अतिक्रमण की शिकायत की थी। शिकायत में प्रार्थना की गई थी की सिंधीबस्ती लालबाग रोड़ पर पांडारोल नाले पर बने पुल के कुछ दूरी से लेकर लालबाग रोड एमपीईबी ऑफिस तक शासकीय भूमि भूजल नाले पर दोनो तरफ के आस पास के रहवासियों, भूमाफियाओं व अवैध कॉलोनाइजरों द्वारा अवैध रूप से शासकीय नाले की भूमि पर अतिक्रमण कर कब्जा करके पक्के निर्माण कर लिये है। नाले पर कॉलोनी की बाउंड्रीवॉल बनाकर अतिक्रमण कर लिया है। किए गए अतिक्रमण का भौतिक सत्यापन कर अतिक्रमणकारियो के विरुध्द नियमानुसार अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की जाना आवश्यक है। नाले की भूमि पर आस पास के रहवासियों तथा भूमाफियाओं द्वारा आरसीसी के पक्के अतिक्रमण करने से नाला बहुत संकरा हो गया है जिससे बारिश में नाले का बहाव नहीं हो पाता है। शिकायत के अंत में शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से निवेदन किया था कि उपरोक्त मामले की जांच कर शासकीय भू जल नाला भूमि पर जिनके द्वारा अतिक्रमण किया गया है उनके विरुध्द कार्यवाही की जाकर उनका अतिक्रमण तोड़े जाने की कृपा की करें। जब शिकायत करने के उपरांत भी कोई कार्यवाही नहीं हुई तो व्यथित हो कर समाजसेवी राकेश सेईवाल ने उच्च न्यायालय जबलपुर में जनहित याचिका दायर की। जिसकी सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अरविंद धर्माधिकारी, न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला ने इस जनहित याचिका पीआईएल पर आदेश जारी किए थें।