छत्रपति शिवाजी महाराज के पुत्र संभाजीराव की जयंती पर उनके चरित्र पर बनी छावा फिल्म को देखने के लिए पहुंचे भाजपाई।
भाजपा युवा नेता गजेन्द्र पाटिल ने युवाओं को दिखाई छावा फिल्म
बुरहानपुर । जिले के शनवारा स्थित भैरव मंदिर पर निर्मित शिवाजी महाराज की प्रतिमा पर भाजपा के युवा नेता गजेंद्र पाटील ने क्रेन के माध्यम से माल्यार्पण किया और संभाजी राव की जयंती मनाई गौरतलब है की संभाजीराव छत्रपति शिवाजी महाराज के ऐसे पुत्र जिन्होंने कभी कोई लड़ाई नहीं हारी और जिन्हें उनकी जयंती पर याद कर शंखनाद के साथ नारे भी लगाए और सभी भाजपाइयों ने छावा फिल्म देखी।
युवा नेता गजेंद्र पाटिल ने बताया कि छत्रपती संभाजीराजे शिवाजीराजे भोसले मराठा साम्राज्य के द्वितीय छत्रपति राजा व छत्रपती शिवाजी महाराज के उत्तराधिकारी थे। संभाजी राजे अपनी वीरता और विद्वत्ता लिये प्रसिद्ध थे। उन्होंने १४ वर्ष की आयु में हिंदू शास्त्रों तथा संस्कृत और मराठी भाषाओं में अच्छी पकड़ हासिल कर उत्कृष्ट साहित्य सर्जन किया था। युवा नेता गजेंद्र पाटिल बताया कि मुगलराजा औरंगज़ेब के साथ उनका संघर्ष इतिहास प्रसिद्ध है। संभाजीराजे ने अपने कम समय के शासन काल में 210 युद्ध किये और इसमे एक प्रमुख बात ये थी कि उनकी सेना एक भी युद्ध में पराभूत नहीं हुई।
मंडल अध्यक्ष अमोल भगत ने बताया कि इस फिल्म की कहानी में छत्रपति शिवाजी महाराज के निधन के बाद मराठा साम्राज्य का आठ वर्षों तक शासन संभालने वाले छत्रपति संभाजी महाराज से जुड़े कई किस्से दिखाए गए।
कौन थे छत्रपति संभाजी महाराज? संभाजी राजे का जन्म 14 मई 1657 को महाराष्ट्र के पुणे से करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पुरंदर के किले में हुआ था। वे छत्रपति शिवाजी महाराज के दो बेटों थे। जिसमें सबसे बड़े बेटे- संभाजी और उसके बाद छोटे बेटे राजाराम। इसी दौर का एक किस्सा लोकप्रिय है। बताया जाता है कि शिवाजी महाराज औरंगजेब की अदालत में आगरा पहुंचे थे। यहां मुगल शासक ने शिवाजी और संभाजी को नजरबंद करने का आदेश दे दिया। हालांकि, शिवाजी मुगलों को चकमा देने में सफल हो गए। इस दौरान संभाजी भी उनके साथ थे। जब शिवाजी आगरा से महाराष्ट्र लौट रहे थे, तब उन्होंने संभाजी को मथुरा में एक रिश्तेदार के यहां छोड़ दिया और उनकी मृत्यु की अफवाह फैला दी। आखिरकार जब मुगलों को लगा कि शिवाजी उनकी पहुंच से बाहर हैं और संभाजी अब दुनिया में नहीं हैं तब उनकी खोज बंद कर दी गई। इसके बाद शिवाजी महाराज ने संभाजी को सही सलामत महाराष्ट्र पहुंचाने का इंतजाम किया।
महज 9 वर्ष की उम्र में हुई थी संभाजी की शादी - छत्रपति शिवाजी महाराज ने मराठा शासन का दायरा बढ़ाने के लिए वैवाहिक गठबंधनों को अहम जरिया बनाया। 1664 के अंत में उन्होंने संभाजी का विवाह दक्षिण-पश्चिम महाराष्ट्र के तल-कोंकणी क्षेत्र में ताकतवर देशमुख परिवार में तय कर दिया। उनकी पत्नी जीवुबाई उर्फ येसुबाई पिलाजी राव शिर्के की बेटी थीं। इस विवाह के जरिए शिवाजी को मराठा साम्राज्य को कोंकण क्षेत्र तक बढ़ाने में मदद मिली।