कैसे बना 'भारत का हृदय'; एमपी
1 नवंबर 1956 को आज ही के दिन मध्यप्रदेश राज्य अस्तित्व में आया था। हालांकि राज्य की राजधानी को चुनने में तत्कालीन सरकार की काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। पढ़ते हैं कि आखिर जबलपुर की जगह आखिर क्यों भोपाल को राजधानी बनानी पड़ी।
'अतुल्य भारत का हृदय' कहे जाने वाले मध्य प्रदेश राज्य के लिए 1 नवंबर आज का दिन बेहद खास है। साल 1956 में इसी दिन यह राज्य वजूद में आया था। 'भारत का हृदय' कहे जाने वाले इस राज्य का इतिहास,संस्कृति और धरोहर अतुल्य है। यह राज्य अपनी प्राकृतिक सौंदर्यता और ऐतिहासिक इमारतों के लिए दुनियाभर में मशहूर है। वर्तमान मध्य प्रदेश 308 लाख हेक्टेयर के भौगोलिक क्षेत्र में फैला हुआ है।
मध्य प्रदेश बनने की कहानी - जब देश के आजादी मिली तब देश में कई छोटी-छोटी रियासतें थीं, जिन्हें आजादी के बाद स्वतंत्र भारत में शामिल कर लिया गया था। 26 जनवरी, 1950 को संविधान लागू हुआ, फिर 1952 में पहले आम चुनाव संपन्न हुए। इसी कारण, संसद एवं विधान मंडल अस्तित्व में आए। इसके बाद 1956 में राज्यों के पुनर्गठन की कवायद के परिणामस्वरूप 1 नवंबर, 1956 को देश में एक नया राज्य, मध्य प्रदेश अस्तित्व में आया।
मध्य प्रदेश के गठन के समय, मध्य भारत, विन्ध्य प्रदेश एवं भोपाल इसके घटक राज्य थे। शुरुआती दौर में तो सभी की अपनी विधानसभाएं थी, लेकिन बाद में फैसला किया गया कि सभी को मिलाकर एक ही विधानसभा बनाई जाएगी। 1 नवंबर, 1956 को पहली मध्यप्रदेश विधान सभा वजूद में आई। इसका पहला और अंतिम अधिवेशन 17 दिसंबर, 1956 से 17 जनवरी, 1957 के बीच पूरा हुआ।
भोपाल कैसे बनी मध्य प्रदेश की राजधानी? - साल 1972 में भोपाल को राज्य का राजधानी घोषित किया गया। भोपाल को राजधानी बनाए जाने में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. शंकर दयाल शर्मा, भोपाल के आखिरी नवाब हमीदुल्ला खान और पंडित जवाहर लाल नेहरू की महत्वपूर्ण भूमिका रही। गौरतलब है कि राज्य की राजधानी ग्वालियर बनाई जानी थी। जबलपुर को लेकर भी राज्य की राजधानी का दावा किया जा रहा था। हालांकि, भोपाल के नवाब भारत के साथ संबंध ही नहीं रखना चाहते थे। वे हैदराबाद के निजाम के साथ मिलकर भारत का विरोध कर रहे थे। केंद्र सरकार नहीं चाहती थी कि 'भारत का हृदय' राट्र विरोधी गतिविधों में शामिल हो इसलिए सरदार पटेल ने भोपाल पर नजर रखने के लिए उसे राजधानी बनाने का फैसला किया।
सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन ऐतिहासिक स्मारकों के लिए प्रसिद्ध है राज्य भगवान राम के वनवास से जुड़ी पौराणिक कथाओं से लेकर पांडव कालीन गुफाएं तक, राज्य अपनी पौराणिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है।