वैद्य सुभाष माने के संग्रहालय पहुंचे छात्र छात्राएं,जाना इतिहास
पीएम खकनार विकास खण्ड की श्री एकीकृत शासकीय हाईस्कूल हैदरपुर के छात्र छात्राओ को वैद्य सुभाष माने के पुरातात्विक संग्रहालय का शैक्षणिक भ्रमण कराया
बुरहानपुर । जिले की पीएम खकनार विकास खण्ड की श्री एकीकृत शासकीय हाईस्कूल हैदरपुर के छात्र छात्राओ को राजघाट स्थित वैद्य सुभाष माने के पुरातात्विक संग्रहालय का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। माने जी का संग्रहालय गौरव एवं अतीत के धरोहर का संरक्षण जीवंत उदाहरण है।
10 जनवरी शुक्रवार को शिक्षक अजय वानखेड़े और कामिनी राय के नेतृत्व में 33 स्कूली बच्चों ने वैद्य सुभाष माने के निवास पहुंच कर भारत के साथ साथ बुरहानपुर का इतिहास भी जाना। साथ ही पुराने सिक्को के साथ साथ संग्रहालय में रखी पुरानी इतिहासिक वस्तुओं को देखा।
वैद्य सुभाष माने ने शासकीय हाईस्कूल हैदरपुर के बच्चों को बुरहानपुर के प्राचीन इतिहास से अवगत कराया हमारा बुरहानपुर शहर अति प्राचीन नगर है यह नगर का सम्बन्ध महाभारत काल तथा रामायण काल से रहा है रामायण काल में जब भगवान् श्रीराम जी वनवास के समय चित्रकूट भ्रमण के समय बुरहानपुर के जंगल में रुके थे आज वह स्थान पर माता सीता जी की सीता नहानी आज भी विद्यमान है तथा लोकगाथा के अनुसार महाभारत के गुरु द्रोणाचार्य जी के सुपुत्र वीर योद्धा अस्वसथामा आज भी ताप्ती नदी में स्नान कर असेरगढ के किले प्राचीन भगवान् शिव जी के दर्शन करने आते हैं बुरहानपुर नगर का प्राचीन नाम ब्रह्मपुर था
बारहवी सदी में यहां राजस्थान के चौहान वंश का शासन था चौहानों के बाद सन् 1295 ईस्वी में फारूकी वंश के अधीन आ गया सन् 1300 ईस्वी में फारूकी राजाओं ने इस नगर नाम बुरहानपुर रखा था फारूकी वंश के बाद मुगल बादशाह अकबर ने बुरहानपुर पर कब्जा कर लिया बुरहानपुर पर मुगलों का शासन सन् 1760 तक रहा
1760 ईस्वी में मराठों के वीर योद्धा बाजीराव पेशवा ने मुगलों को हराकर मराठा साम्राज्य की नींव रखी बुरहानपुर से ग्वालियर का शासक सिंधिया वंश के हाथों मे दिया बुरहानपुर शहर में मुगल बादशाह अकबर से लेकर शाह आलम और सिंधिया वंश के पांच राजाओं ने बुरहानपुर टकसाल से सोने, चांदी, तथा तांबे के सिक्के अपने नाम से निकाले थे तथा आज भी ताप्ती नदी में और जमीन उत्खनन में 2600 वर्ष पूर्व के प्राचीन पंचमार्क सिक्के मिलते हैं वैद्य सुभाष माने साथ ही अपने द्वारा किए प्राचीन वस्तुओं तथा होलकर वंश, छत्रपति शिवाजी महाराज, सिंधिया वंश, रानी देवी अहिल्याबाई होलकर, प्राचीन पंचमार्क सिक्का जिस पर भगवान् राम जी माता सीता लक्ष्मण जी अंकित है, तथा मुगल बादशाह के सिक्कों से अवगत कराया और बच्चों से कहा अपने घर में रखे पूर्वजों के पुराने बर्तन सिक्के फर्नीचर पैंटिग संदुक कबाड़ में नहीं बेचें पूर्वजों कि विरासत को संजोए रखें।
शिक्षक अजय वानखेड़े के बच्चों को बताया कि यह संग्रहालय हमारे बुरहानपुर का गौरव एवं अतीत के धरोहर का संरक्षण जीवंत उदाहरण है। संग्रहालय में संग्रहित ऐतिहासिक पुरावशेष में राजाओं के द्वारा प्रयोग किये जाने वाले दैनिक उपयोगी वस्तुएं, आभूषण, उपकरण, विभिन्न काल में प्रचलित सिक्के, क्रमशः जनता द्वारा उपयोग किए जाने वाले घरेलू उपकरण को आईने की भांति संग्रहित कर अक्षुण्ण रखा गया है।